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भारतीय रेल स्थानांतरण नियम संहिता - Railway Transfer Rules

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Railway Transfer Rules 8. स्वयं अनुरोध स्थानांतरण (Own-Requested Transfer)

Railway Transfer Rules 8. स्वयं अनुरोध स्थानांतरण (Own Requested Transfer)

 यह अध्याय “भारतीय रेल स्थानांतरण नियम संहिता” पुस्तक पर आधारित है।

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रेलवे सेवा में कर्मचारियों को उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों, जैसे पारिवारिक सुविधा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी कारण अथवा अन्य व्यावहारिक आवश्यकताओं के आधार पर स्थानांतरण हेतु आवेदन करने की अनुमति प्रदान की गई है। इस प्रकार के स्थानांतरण को Own Request Transfer कहा जाता है।

  • यह एक स्थापित नियमात्मक सिद्धांत है कि स्वयं अनुरोध पर किया गया स्थानांतरण कर्मचारी का वैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक सुविधा है, जिसे सक्षम प्राधिकारी अपने विवेकाधिकार के आधार पर स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है। इस प्रकार के स्थानांतरण में प्रशासनिक आवश्यकता, रिक्ति की उपलब्धता तथा संगठनात्मक हित सर्वोपरि माने जाते हैं।

    स्वयं अनुरोध स्थानांतरण के संबंध में निम्न प्रावधान लागू होते हैं—

    • IREM Vol. I, Para 312 – Transfer on Request
    • Master Circular No. 24
    • रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी RBE निर्देश (Own Request Transfer Instructions)

    इन प्रावधानों के अनुसार, स्वयं अनुरोध स्थानांतरण को एक नियंत्रित एवं Conditional व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया गया है, जिसमें कर्मचारी की सुविधा एवं प्रशासनिक हितों के मध्य संतुलन बनाए रखा जाता है।

Railway Transfer Rules 7. सतर्कता स्थानांतरण एवं शिकायत आधारित कार्रवाई (Vigilance Transfers and Complaint-Based Action)

Railway Transfer Rules 7. सतर्कता स्थानांतरण एवं शिकायत आधारित कार्रवाई (Vigilance Transfers and Complaint-Based Action)

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7. सतर्कता स्थानांतरण एवं शिकायत आधारित कार्रवाई

 

कुछ परिस्थितियों में रेलवे कर्मचारियों का स्थानांतरण सतर्कता संगठन या विशेष जांच एजेंसियों, जैसे CBI/SPE, के निर्देश पर किया जाता है। इस प्रकार का स्थानांतरण मुख्यतः उन मामलों में किया जाता है जहां किसी कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत, जांच या अनियमितता के आरोप लंबित हों।

ऐसे स्थानांतरण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष एवं बिना किसी बाहरी प्रभाव के संपन्न हो सके। इस उद्देश्य से कर्मचारी को उसके वर्तमान कार्यस्थल या संवेदनशील पद से हटाकर किसी अन्य स्थान या गैर-संवेदनशील पद पर पदस्थापित किया जाता है।

Railway Transfer Rules: 6. आवधिक स्थानांतरण एवं संवेदनशील पद (Periodic Transfers and Sensitive Posts)

Railway Transfer Rules: 6. आवधिक स्थानांतरण एवं संवेदनशील पद (Periodic Transfers and Sensitive Posts)

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6. आवधिक स्थानांतरण एवं संवेदनशील पद

 

रेलवे प्रशासन में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का आवधिक स्थानांतरण एक स्थापित प्रशासनिक एवं सतर्कता संबंधी सिद्धांत है। यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ करती है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को रोकने हेतु एक प्रभावी “Preventive Vigilance Measure” के रूप में भी कार्य करती है।

Master Circular में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक हित में कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जा सकता है तथा जहाँ आवश्यक हो, नियमित रोटेशन लागू किया जाना चाहिए। इसी प्रकार Railway Vigilance Manual में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए समयबद्ध रोटेशन की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

संवेदनशील पद की अवधारणा एवं परिभाषा

संवेदनशील पद ऐसे पद होते हैं, जहाँ कर्मचारी का कार्य स्वभावतः ऐसी गतिविधियों से जुड़ा होता है जिनमें विवेकाधीन निर्णय, वित्तीय प्रभाव, अथवा बाहरी पक्षों के साथ संपर्क शामिल होता है। CVC Guidelines on Sensitive Posts के अनुसार, वे सभी पद जहाँ “scope for discretion, public interface or financial implication exists”, संवेदनशील माने जाते हैं।

इस प्रकार, व्यावहारिक रूप से संवेदनशील पदों में वे सभी पद सम्मिलित होते हैं जहाँ कर्मचारी—

  • जनता से प्रत्यक्ष संपर्क रखता है,
  • ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं या बाहरी एजेंसियों से व्यवहार करता है,
  • वित्तीय लेन-देन या भुगतान प्रक्रिया में संलग्न होता है,
  • राजस्व संग्रह या नकद प्रबंधन करता है,
  • निरीक्षण, प्रमाणीकरण या स्वीकृति का अधिकार रखता है।

ऐसे पदों पर दीर्घकाल तक कार्यरत रहने से व्यक्तिगत प्रभाव विकसित होने तथा निष्पक्षता प्रभावित होने की संभावना रहती है, अतः इन्हें प्रशासनिक दृष्टि से “Risk-prone” माना गया है।

विभागीय परिप्रेक्ष्य में संवेदनशील पद

रेलवे बोर्ड द्वारा संवेदनशील पदों की कोई एक समान सूची निर्धारित नहीं की गई है। Railway Vigilance Manual के अनुसार, प्रत्येक विभाग/यूनिट को अपने कार्य की प्रकृति के आधार पर संवेदनशील एवं गैर-संवेदनशील पदों की पहचान करनी होती है तथा समय-समय पर उसकी समीक्षा करनी होती है।

व्यावहारिक रूप से निम्न विभागों में संवेदनशील पद सामान्यतः पाए जाते हैं—

·       वाणिज्य विभाग में राजस्व संग्रह, बुकिंग, पार्सल एवं माल संचालन से जुड़े पद;

·       परिचालन विभाग में स्टेशन प्रबंधन एवं ट्रेन नियंत्रण से जुड़े पद;

·       लेखा विभाग में भुगतान, बिल पासिंग एवं नकद प्रबंधन से संबंधित पद;

·       भंडार विभाग में निविदा, खरीद एवं आपूर्ति से जुड़े पद;

·       इंजीनियरिंग, विद्युत एवं यांत्रिक विभागों में ठेका कार्य, मापन एवं प्रमाणन से संबंधित पद; तथा

·       चिकित्सा विभाग में औषधि खरीद एवं भंडारण से जुड़े पद।

यह ध्यान देने योग्य है कि उक्त विवरण केवल उदाहरणात्मक है तथा प्रत्येक रेलवे/डिवीजन द्वारा अपनी Approved Sensitive Post List पृथक रूप से अधिसूचित की जाती है।

आवधिक स्थानांतरण की अवधि (Tenure Norms)

संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के कार्यकाल के संबंध में CVC तथा Railway Vigilance Manual में यह निर्देशित किया गया है कि ऐसे पदों पर कर्मचारियों का कार्यकाल सीमित होना चाहिए तथा समयबद्ध रोटेशन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सामान्यतः, प्रचलित दिशानिर्देशों के अनुसार—

  • संवेदनशील पद पर सामान्य कार्यकाल लगभग 3 वर्ष रखा जाता है,
  • विशेष परिस्थितियों में इसे अधिकतम 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

इस प्रकार, किसी भी कर्मचारी का एक ही संवेदनशील पद पर दीर्घकाल तक बने रहना उचित नहीं माना जाता और नियत अवधि होने पर उसका स्थानांतरण या रोटेशन किया जाना अपेक्षित है।

स्थानांतरण के प्रकार (Modes of Rotation)

संवेदनशील पदों पर रोटेशन दो प्रकार से लागू किया जाता है। प्रथम, कर्मचारी को एक स्टेशन अथवा इकाई से दूसरी इकाई में स्थानांतरित किया जाता है, जिसे Inter-Station Transfer कहा जाता है। द्वितीय, कर्मचारी को उसी स्टेशन अथवा कार्यालय के भीतर किसी अन्य सीट, कार्य अथवा अनुभाग में स्थानांतरित किया जाता है, जिसे Intra-Station Rotation कहा जाता है।

Railway Board Instructions के अनुसार, जहाँ संभव हो, Intra-Station Rotation को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि कर्मचारियों के स्थान परिवर्तन से होने वाली असुविधा को न्यूनतम रखा जा सके, जबकि सतर्कता के उद्देश्य भी पूर्ण हो सकें।

सतर्कता दृष्टिकोण एवं औचित्य

संवेदनशील पदों पर आवधिक स्थानांतरण को Preventive Vigilance का एक महत्वपूर्ण उपकरण माना गया है। Railway Vigilance Manual में यह स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार को केवल दंडात्मक कार्रवाई से नहीं, बल्कि Prevention के माध्यम से नियंत्रित किया जाना अधिक प्रभावी है।

इस संदर्भ में रोटेशन का उद्देश्य भ्रष्टाचार की संभावना को कम करना, अनियमितताओं को रोकना तथा प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना है। यह विशेष रूप से स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार का स्थानांतरण दंडात्मक नहीं है, बल्कि यह एक Routine Administrative Measure है।

अनुमोदन एवं नियंत्रण (Approval and Monitoring)

संवेदनशील पदों की पहचान, उनकी सूची का अनुमोदन तथा रोटेशन नीति का निर्धारण संबंधित विभागाध्यक्ष अथवा मंडल स्तर पर DRM द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में सतर्कता विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो समय-समय पर इस व्यवस्था की निगरानी करता है।

Railway Vigilance Manual के अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि संवेदनशील पदों की सूची अद्यतन रहे तथा रोटेशन नीति का निष्पक्ष एवं समान रूप से अनुपालन किया जाए।

प्रशासनिक औचित्य एवं प्रभाव

संवेदनशील पदों पर दीर्घकालीन तैनाती से प्रशासनिक प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे व्यक्तिगत प्रभाव, पक्षपात, हितों का टकराव तथा कार्यप्रणाली में अपारदर्शिता उत्पन्न होने की संभावना रहती है। अतः निश्चित अवधि के पश्चात रोटेशन को प्रशासनिक आवश्यकता के रूप में स्वीकार किया गया है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि आवधिक स्थानांतरण को सेवा की सामान्य शर्त माना जाता है और इसे किसी भी प्रकार से दंडात्मक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

व्यवहारिक दिशा-निर्देश (Practical Guidelines)

संवेदनशील पदों पर रोटेशन लागू करते समय यह अपेक्षित है कि कार्यकाल की गणना संबंधित पद/सीट के आधार पर की जाए, संवेदनशील पदों की सूची सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित एवं अद्यतन हो, तथा सभी कर्मचारियों पर समान रूप से नियम लागू किए जाएँ। रोटेशन प्रस्ताव पूर्व स्वीकृति के पश्चात ही लागू किया जाए तथा जहाँ आवश्यक हो, सतर्कता समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

Railway Transfer Rules: 5. स्थानांतरण की प्रक्रिया एवं प्रशासनिक औपचारिकताएँ (Transfer Process and Administrative Formalities)

Railway Transfer Rules: 5. स्थानांतरण की प्रक्रिया एवं प्रशासनिक औपचारिकताएँ (Transfer Process and Administrative Formalities)

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5. स्थानांतरण की प्रक्रिया एवं प्रशासनिक औपचारिकताएँ

 

रेलवे कर्मचारियों के स्थानांतरण से संबंधित समस्त कार्यवाही एक निर्धारित एवं सुव्यवस्थित प्रशासनिक प्रक्रिया के अंतर्गत संपादित की जाती है। यह प्रक्रिया केवल स्थानांतरण आदेश जारी करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें प्रशासनिक नियंत्रण, पहचान सत्यापन, सेवा अभिलेखों की निरंतरता तथा विभिन्न स्तरों पर परीक्षण एवं अनुमोदन की बहु-स्तरीय प्रणाली सम्मिलित होती है।

भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (IREC), खंड-I के नियम 226 से 231 के अंतर्गत स्थानांतरण का मूल अधिकार एवं प्रशासनिक ढांचा निर्धारित किया गया है, जबकि भारतीय रेलवे स्थापना मैनुअल (IREM) तथा Master Circular No. 24 में प्रक्रिया संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं।

Railway Transfer Rules: 4. प्रशासनिक स्थानांतरण (Administrative Transfer)

Railway Transfer Rules: 4. प्रशासनिक स्थानांतरण (Administrative Transfer)

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4. प्रशासनिक स्थानांतरण

 

अस्थायी से अलावा स्थायी स्थानांतरण सामान्यतः प्रशासनिक आवश्यकताओं अथवा कर्मचारियों के अनुरोधों के आधार पर किया जाता है। प्रशासनिक आवश्यकता के अंतर्गत वे सभी परिस्थितियाँ सम्मिलित होती हैं, जिनमें संगठन के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कर्मचारियों का पुनःस्थापन आवश्यक हो।

इन परिस्थितियों में मुख्यतः निम्न स्थितियाँ शामिल होती हैं—

  • पदोन्नति के परिणामस्वरूप स्थानांतरण
  • कैडर में कटौती
  • किसी इकाई, शेड या कार्यालय का बंद होना
  • कार्यभार का पुनर्वितरण

जब किसी कैडर में कटौती की स्थिति उत्पन्न होती है, तो सामान्य नियम के अनुसार कनिष्ठतम (Junior-most) कर्मचारी को पहले स्थानांतरित किया जाना चाहिए। यह सिद्धांत प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए अपनाया जाता है।

यदि किसी स्टेशन या इकाई में गतिविधि समाप्त हो जाती है और बड़ी संख्या में कर्मचारियों का स्थानांतरण आवश्यक हो, तो इस प्रक्रिया से पूर्व श्रमिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जाना अपेक्षित है, ताकि उत्पन्न होने वाली मानवीय समस्याओं का समाधान किया जा सके।

Railway Transfer Rules: 3. स्थानांतरण का प्रकार (Types of Transfer)

Railway Transfer Rules: 3. स्थानांतरण का प्रकार (Types of Transfer)

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3. स्थानांतरण का प्रकार

 

रेलवे सेवा में स्थानांतरण एक व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे उसके स्वरूप (Nature) तथा उद्देश्य के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। स्थानांतरण का यह वर्गीकरण केवल सैद्धांतिक महत्व का नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव कर्मचारी के कार्यस्थल, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा सेवा शर्तों पर पड़ता है। अतः प्रत्येक स्थानांतरण को उसके प्रकार के अनुसार समझना आवश्यक है।

व्यापक रूप से स्थानांतरण को दो प्रमुख आधारों पर समझा जाता है— पहला, उसके स्वरूप के आधार पर तथा दूसरा, उसके उद्देश्य अथवा प्रशासनिक कारण के आधार पर।

Railway Transfer Rules: 2. स्थानांतरण की परिभाषा

Railway Transfer Rules: 2. स्थानांतरण की परिभाषा

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2. स्थानांतरण की परिभाषा

 

स्थानांतरण का आशय किसी रेलवे कर्मचारी को उस मुख्यालय स्टेशन से, जहाँ वह वर्तमान में कार्यरत है, किसी अन्य मुख्यालय स्टेशन पर पदस्थापित करना है। यह परिवर्तन केवल भौगोलिक स्थान का बदलाव नहीं है, बल्कि प्रशासनिक संरचना, कार्य दायित्व एवं वरिष्ठता इकाई से भी संबंधित हो सकता है।

सामान्यतः स्थानांतरण निम्न परिस्थितियों में किया जाता है:

(i) किसी नए पद पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु

(ii) मुख्यालय अथवा वरिष्ठता इकाई में परिवर्तन के परिणामस्वरूप

उक्त प्रावधान भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (Indian Railway Establishment Code – IREC), खंड-I के नियम 226 से 231 के अंतर्गत विनियमित है।

यह भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि स्थानांतरण को किसी भी परिस्थिति में दंड के रूप में नहीं माना जाएगा।

Railway Transfer Rules: 1. प्रारंभिक प्रावधान और मूल अवधारणा

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1. प्रारंभिक प्रावधान एवं मूल अवधारणा

 

रेलवे बोर्ड द्वारा अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों के स्थानांतरण से संबंधित विषय पर समय-समय पर विभिन्न निर्देश, परिपत्र एवं आदेश जारी किए जाते रहे हैं। इन सभी बिखरे हुए निर्देशों को एक समेकित स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से Master Circular No. 24 जारी किया गया।

इसके पश्चात, समय के साथ बदलती प्रशासनिक आवश्यकताओं, नई नीतियों तथा विभिन्न रेलवे बोर्ड के आदेशों को सम्मिलित करते हुए इस मास्टर सर्कुलर को update किया गया। वर्तमान स्वरूप में यह सर्कुलर स्थानांतरण से संबंधित सभी प्रमुख नियमों, प्रक्रियाओं तथा दिशा-निर्देशों का एक समेकित एवं संदर्भित (consolidated reference) दस्तावेज है।

इस सर्कुलर का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानांतरण से संबंधित निर्णय एक समान नीति के आधार पर लिए जाएँ तथा सभी स्तरों पर पारदर्शिता एवं प्रशासनिक एकरूपता बनी रहे।

यह सर्कुलर निम्न प्रमुख नियमों एवं स्रोतों पर आधारित है:

भारतीय रेल स्थानांतरण नियम संहिता - Railway Transfer Rules

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क्षेत्रीय रेलों पर अराजपत्रित कर्मचारियों के पारस्परिक स्थानांतरण संबंधी व्यापक नीति



भारत सरकार

रेल मंत्रालया

(रेलवे बोर्ड)

सं. ई(एनजी)।-2048/टीआर/8                                            RBE No. 08/2019

नई दिल्‍ली, दिनांक                                                                         11.01.2019

महाप्रबंधक (पी),

सभी क्षेत्रीय रेलें एवं उत्पादन इकाइयां आदि।

(मानक सूची के अनुसार)

विषय: क्षेत्रीय रेलों पर अराजपत्रित कर्मचारियों के पारस्परिक स्थानांतरण संबंधी व्यापक नीति

पारस्परिक अदला-बदली आधार पर स्थानांतरण विनियमित करने और उसके बाद वरीयता का निर्धारण

करने से संबंधित नीति अनुदेश आईआरईसी वॉल्यूम-। के पैरा 230 और आईआरईएम वॉल्यूम-1989 संस्करण के पैरा 310 में अंतर्निहित हैं। ऐसे स्थानांतरण (स्थानांतरणों) करने के लिए समय-समय पर प्रशासनिक अनुदेश भी जारी किए गए हैं। अप्रचलित / पुराने अनुदेशों को समेकित करने और इनका अधिक्रमण करने की आवश्यकता को देखते हुए, इस परिपत्र में उक्‍त विषय पर अभी तक के पिछले सभी अनुदेशों के अधिक्रमण में सभी नवीनतम अद्यतन नीतिगत अनुदेश सूचीबद्ध किए गए हैं।

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